मंगलवार, 23 सितंबर 2008

प्रेमी - प्रेमिका

अजीब सा रिश्ता है, ये प्यार का कही भी बन जाता है
कभी हो जाती है सेटिंग स्कूल में , तो कभी कॉलेज में
या अपने घर के सामने वाली खिड़की में
या फिर राह चलते या फिर सफर के सफर में
आज कल तो सेटिंग होने लगी है, मंदिरों में भी यारो
सजके आते है , आशिको के चच्चा , लैलाओ की नानी
घरवाले सोचते है की आज कल आस्तिक हो गया है बच्चा अपना
पर वो कही और ही गुल KHILATA है,, माँ वैष्णो देवी की जगह
पूजा वर्मा के चक्कर लगता है
लड़किया भी कुछ कम नही है आज के दोर में देखो
घर से निकलती तो ये kehkar की आज टूशन या सहेली के घर उसकी बर्थडे पार्टी है
मगर वो पार्को में और सिनेमा होल्लो में नन्हे आशिक बने फिरते है
चाहें ख़ुद की औकात नही हो चवन्नी की मगर गर्ल-फ्रेंड में पे वो हजारो रोज़ khrachte है
और लड़किया चुपके -चुपके सायानी हो चली है , खाया-पिया murgaa ही फसाती है
ख़ुद तो उसे रोजे खाती है और कभी कभी अपनी सहेलियों के लिए भी छोड़ जाया करती है
मोबाइल के चक्कर में प्यार सस्ता हो चला है , कट -कॉपी पेस्ट से दिल का हाल बाया होता है
जो न जानता हो शायरी का जुमला भी वो लाखो शेर मिनटों में अपनी प्रिये को फॉरवर्ड करता है
प्रेमी ने कहा
मेरी जान तू मेरा ईमान तू
तू इस कदर मुझ में समां गई है
में ख़ुद को तो अक्सर भूल जाता हु
मगर जब भी तू याद आती है
तुझसे मिलने को जुलाब सा मचलता है दिल

पेर्मिका ने कहा
मेरे महबूब , मेरे जानू
तू ही तू अब तो दिल में ujhlataaरहता है
ये तेरा नशा है , या फिर तेरी मोहब्बत है
आज कल तो मेरा अब्बू भी पूछता है मुझसे
बेटी ये तेरे मोबाइल पर किस कम्बखत का चेहरा है

प्रेमी ने कहा
तेरे अब्बू को तू बस इतना kehde
है ये मेरी जान कोई paraya nai है
अभी है ये मोबाइल पर,, कल अपने घर में होगा
उससे जो ukhadta है ukhaad ले वो
kyunki वो आशिक है मेरा , नही मिलती उससे उसकी सूरत

प्रेमिका ने कहा
मेरे आशिक मेरी मोहब्बत के rakhwale
मेरे अब्बू को प्यार अपना समझ नही आता है
तू leja mujhai घर से अपनी bana ले
kyunki मेरा बाप लगा है
तेरी talaash में tamam pagal khano में

प्रेमी ने कहा
tujhko chahna शायद भूल थी मेरी
तेरी खातिर में अपना sara बैंक balance uda baitha
अपने gharwalo और dosto में बदनाम हो गया हु
और tune भी khub nibhayi aashki मेरी
जो भी खाया पिया मेरे paiSO से
फ़ोन करता रहा TUJHKO में BARSO से
और तू है आज सुन लेती है की में PAGAL हु
तू JA और कही किसी और से अब ISHQ FARHMA
KYUNKI THIK ही कहा है BUJURGO ने
ये AASHIQI नही nibhti ladakpan में
ये नई -naveli fulljhadiyo से

2 टिप्‍पणियां:

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

वाह वाह....
सामयिक युवा चिंतन से जुड़ी इस कविता हेतु बधाई स्वीकारें..

shelley ने कहा…

mein puri tarah sahmat nahi hu. ho sakta hai aaj pyar ka swrub badal gaya hai par iska ye matlab thode hi hai ki savi aisa karten ho. aaj v sachchhe pyar karne wale jarur hongen.