जिन्दगी दोड़ती चली जाती है
अब ख़ुशीया मेरे पास ठहर नहीं पाती है
मैं कितनी भी कोशिश करूँ
खुश रहने की
अब इन होठो पे हँसी नहीं आती है
जयदेव जोनवाल एक उभरते हुए युवा कवि हैं, जिनकी रचनाओं में उसी ताजगी का आभास होता है जो वास्तव में एक युवा कवि की रचनाओं में होना चाहिए। मेरी उन्हें ढेरों शुभकामनायें। जयदेव अच्छी रचनाओं का निर्माण करें और हिन्दी की निरंतर सेवा करते रहें। जय हिंद! जय हिन्दी! सुमित प्रताप सिंह (दिल्ली गान के रचयिता) हास्य कवि जयदेव जोनवाल सम्पर्क सूत्र -: 09250683519,8826725292
सोमवार, 28 मई 2012
तेरे गम से ये मेरी आँखे नम है
तेरे गम से ये मेरी आँखे नम है
मुझको रोने की नहीं आदत
पर क्या तेरा ये गम कम है
लाख कोशिश करू
फिर भी ये आंसू आ ही जाते है
आज भी तेरा मुझपर ये असर कम है
मुझको रोने की नहीं आदत
पर क्या तेरा ये गम कम है
लाख कोशिश करू
फिर भी ये आंसू आ ही जाते है
आज भी तेरा मुझपर ये असर कम है
मैं दुनिया से नहीं डरता
मैं दुनिया से नहीं डरता
मुझको तुझसे डर लगता है
लोग झुठे है
यहाँ और दिखावे का लिबास ओढ़ लेते है
चलो ये तो गैर है अपने नहीं
पर मुझे तेरी सच्चाई से डर लगता है
मुझको तुझसे डर लगता है
लोग झुठे है
यहाँ और दिखावे का लिबास ओढ़ लेते है
चलो ये तो गैर है अपने नहीं
पर मुझे तेरी सच्चाई से डर लगता है
शुक्रवार, 25 मई 2012
हो कोई साथ तो अच्छा लगता है
हो कोई साथ तो अच्छा लगता है
मुझको तेरे पास अच्छा लगता है
यूँ तो जानती नहीं
वो मुझको और मैं उसको
पर ये अंजना एहसास अच्छा लगता है
बोल दूँ उससे मैं
इस दिल की हसरत
पर उसकी आँखों से मुझे डर लगता है
मुझको तेरे पास अच्छा लगता है
यूँ तो जानती नहीं
वो मुझको और मैं उसको
पर ये अंजना एहसास अच्छा लगता है
बोल दूँ उससे मैं
इस दिल की हसरत
पर उसकी आँखों से मुझे डर लगता है
तेरी बातों में जीने का मज़ा आता है
तेरी बातों में जीने का मज़ा आता है
देख कर तुझको
ये शख्स मुस्कुराता है
देख ज़माने की नीयत ठीक नहीं
खुद को संभालना ऐ - हँसी
देखकर तुझको मैं तो क्या
उस खुदा का कभी ईमान डोल जाता है
देख कर तुझको
ये शख्स मुस्कुराता है
देख ज़माने की नीयत ठीक नहीं
खुद को संभालना ऐ - हँसी
देखकर तुझको मैं तो क्या
उस खुदा का कभी ईमान डोल जाता है
पलकों पे मेरे-तेरे ख़ुवाब ठहर जाते है
पलकों पे मेरे-तेरे
ख़ुवाब ठहर जाते है
अरमा ये मेरे दिल के
सब अश्को में बह जाते है
मेरे कहने से कहा
होती है तू मेरी
और एक हम है
जो तेरी खातिर मिटे जाते है
ख़ुवाब ठहर जाते है
अरमा ये मेरे दिल के
सब अश्को में बह जाते है
मेरे कहने से कहा
होती है तू मेरी
और एक हम है
जो तेरी खातिर मिटे जाते है
बुधवार, 23 मई 2012
मैं कभी प्यार से तुमको अपना कहूँ तो बुरा क्या है?
मैं कभी प्यार से तुमको
अपना कहूँ तो बुरा क्या है?
मैं कभी तुमको
गले से लगा लूँ गिला क्या है ?
हाँ तुमको पसंद नहीं है
ये मेरा दीवानापन
पर अगर मैं
तुम्हारे सामने बहक जाऊं
तो सजा क्या है?
अपना कहूँ तो बुरा क्या है?
मैं कभी तुमको
गले से लगा लूँ गिला क्या है ?
हाँ तुमको पसंद नहीं है
ये मेरा दीवानापन
पर अगर मैं
तुम्हारे सामने बहक जाऊं
तो सजा क्या है?
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