मंगलवार, 10 जुलाई 2012

रात अब खुवाब नहीं लाती


रात अब खुवाब नहीं लाती
अब मुझे नींद नहीं आती
ये कैसी कशमकश है
तेरे-मेरे बीच में
अब तो भूले से भी
 मेरे इन होठो पे कभी हँसी नहीं आती

शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

मुझको रोने भी नहीं देती


मुझको रोने भी नहीं देती
और मुझको हसने भी नहीं देती
ये कैसी मोहब्बत है तेरी मुझसे
जो हमको साथ होने भी नहीं देती
और हमको कभी बिछड़ने भी नहीं देती

मैं इस दर से उठकर अब जाऊ तो कहाँ

मैं इस दर से उठकर
अब जाऊ तो कहाँ 
अब तुझको भूलाकर 
मैं और पाऊं तो क्या 
मेरी जिन्दगी का नूर थी तू 
मैं इस जिन्दगी से अब और चाहूँ तो क्या 
जख्म गहरे है,निशा छोड़ते है 
मैं अब तेरी यादो को खुद से मिटाऊ तो क्या 
मेरे दर्द की बस अब तू ही दवा है 
अब तुझे छोड़कर मैं जाऊ तो कहाँ 
दर्द जितना भी है 
मैं वो सब सह लूँगा 
पर अब मैं तुझको और सताऊ तो क्या

रविवार, 1 जुलाई 2012

मैं चला गया तो तुझको मुश्किल होगी

मैं चला गया तो तुझको मुश्किल होगी
याद जब भी मैं आया तुझे
तो हर रात बोझिल होगी
तुझे जो भी शिकायत है मुझसे
वो तू जानता है
पर क्या मेरे जाने से
तेरी हर शिकायत दूर होगी 

उसने मुझे अपना भी कहा

उसने मुझे अपना भी कहा
और वो कभी मेरी भी ना हुई
ये कैसा प्यार है उसका
वो हमेशा साथ मेरे भी रही
मगर फिर भी वो आज क्यूँ मेरे साथ नहीं 

मेरे प्यार का ये सिला अच्छा है

मेरे प्यार का ये सिला अच्छा है
यूँ करीब लाके मुझे
फिर तेरा ठुकराना अच्छा है
हाँ मेरे प्यार का यही
ईनाम तो बनता है
तेरा मुझको अपना बनाके
यूँ मिटाना अच्छा है 

मेरे हाथो की लकीरों में नहीं तू

मेरे हाथो की लकीरों में नहीं तू
तू मेरे इस दिल में है
लोग जिसको नसीब कहते है
वो वहम  है उनका
मेरे लिए तो तेरा होना ही सारी खुदाई है