शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

इन दीवारों से बहार अब उनकी आवाज़ नहीं जाती

इन दीवारों से बहार अब उनकी आवाज़ नहीं जाती
शायद कोई तो वजह है
जो अब वो कोयल की तरहा
पहले जैसी अब नहीं चह -चहiती

इन दीवारों से बहार अब उनकी आवाज़ नहीं जाती

इन दीवारों से बहार अब उनकी आवाज़ नहीं जाती
शायद कोई तो वजह है
जो अब वो कोयल की तरहा
पहले जैसी अब नहीं चह -चहiती 

अश्क आँखों से बहे और समंदर बन गए

अश्क आँखों से बहे और समंदर बन गए
तैरने की आदत नहीं थी मुझे
मैं यूँ तेरे भरोसे पर था
आँख जब मेरी खुली तो
मेरे सारे सपने मेरे सामने बिखर कर रह गए 

शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

तुम यूँ मुझे प्यार से ना देखा करो

तुम यूँ मुझे प्यार से ना देखा करो
ये दिल पागल है
मचल ही जाता है
तुम तो चाँद हो अकेले भी रोशनी दोगी
और देख के तुमको ये मेरा सितारा डूब जाता है  

इश्क होतो डर लगता है

इश्क होतो डर लगता है
इश्क ना होतो डर लगता है
उसके प्यार से, उसके गुस्से से
उसकी मासूमियत से मुझे डर लगता है
यूँ तो मैं डरपोक नहीं हूँ
मगर उसके इरादों से मुझे डर लगता है 

बेखयाली में ख्याल नहीं था

बेखयाली में ख्याल नहीं था
जब दिल लगाया तुमसे
तो मुझको होश नहीं था
मैं मिट गया बस तेरी फिक्र में
और एक तू था जिसकी नज़र में
मैं कुछ नहीं था .....
 

यूँ मोहब्बत में मरना तो पड़ेगा

यूँ मोहब्बत में मरना तो पड़ेगा
प्यार जो किया है तो तड़पना तो पड़ेगा
मेरे चाहने और ना चाहने से क्या होता है
इश्क जो किया है तो इम्तिहानो से गुज़ारना तो पड़ेगा