शुक्रवार, 14 सितंबर 2012

देख के तुझको आज मैं खोया सा हूँ

देख के तुझको आज मैं खोया सा हूँ
मैं करूँ तारीफ कैसे तेरी आज ?
मैं खुद ही आज
 तेरे हुस्न में उलझा सा हूँ

सारी दुनिया में तेरा रुबाब बहुत है

सारी दुनिया में तेरा रुबाब बहुत है 
तेरे चेहरे पे फैला आफ़ताब बहुत है 
मेरा दिल तो भर जाता है 
तेरी सूरत को देख के 
मेरे लिए तो तेरा बस साथ बहुत है 

शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

तेरा ख्याल अच्छा है


तेरा ख्याल अच्छा है 
तेरा सवाल अच्छा है
मेरी हर बात पर
यूँ बिगड़ जाना तेरा
ये अंदाज़ अच्छा है 
देके दर्द मुझे फिर मेरी दवा भी
खुद करती हो?
तेरा ये अपनापन अच्छा है 

तेरा इंतज़ार बस इंतज़ार रहा


तेरा इंतज़ार बस इंतज़ार रहा 
मेरा प्यार बस खामोश ही रहा 
कह तो मैं भी देता अपने दिल की बात 
 मगर तेरे पास मुझे सुनने के लिए
कभी वक़्त ही कहाँ रहा 

मैंने रब से कहा


मैंने रब से कहा
वो छोड़ के गया मुझको
पता नहीं उसकी क्या मज़बूरी थी
रब ने कहा इसमें उसका कोई कसूर नहीं
ये कहानी तो मैंने ही अधूरी लिखी थी

मैं जो हूँ उसकी वजह तुम हो


मैं जो हूँ उसकी वजह तुम हो
मेरा वजूद मेरी हकीकत का आईना तुम हो
मैं नहीं होता कुछ भी
गर मुझको साथ ना मिला होता तुम्हारा
मेरे बढ़ते कदम का आगाज़ तुम हो 

बुधवार, 29 अगस्त 2012

तुझको पाने में एक वक़्त लगा


तुझको पाने में एक वक़्त लगा
तुझको खोने में एक वक़्त लगा
साथ तेरे मैं खुश था तो एक वक़्त लगा
जो मैं बिछड़ा तुझसे
तो मुझे तुझे भुलाने में एक वक़्त लगा