शुक्रवार, 18 मई 2012

आज तू मुझपे एक एहशान कर

आज तू मुझपे एक एहशान कर
या तो होजा तू मेरी
या मुझको तेरे नाम कर
अब नहीं होता है ..
ये इंतज़ार मुझसे तेरा रोज़ -रोज़
ऐ -सनम अब तो ख़तम ये इश्तिहार कर

मुझको अपना भी कहती हो

मुझको अपना भी कहती हो
और मुझसे ये दूरिया भी रखती हो
हो मेरी तुम इसका दावा भी करती हो
और लोगो से मुझे छुपाया भी करती हो
हाँ दिखाती हो मेरे लिए ये अपनापन भी तुम
और मुझ पर ही तुम भरोसा करने से डरती हो

मंगलवार, 15 मई 2012

किसी को अपना बनाने में वक़्त लगता है

किसी को अपना बनाने में वक़्त लगता है
किसी का हो जाने में वक़्त लगता है
ये दिल यूँ तो धड़कता है रोज़ ही
पर इस दिल में ........
किसी को समाने में वक़्त लगता है

इन आँखों ने नहीं देखा कोई चेहरा तुझसा

इन आँखों ने नहीं देखा
कोई चेहरा तुझसा
मुझको अच्छा नहीं लगा
कोई शक्स तुझसा
बड़े इत्मीनान से देखी
मैंने ये दुनिया सारी
पर मुझे कोई और ना मिला
सरे जहा में तुझ जैसा

रात आंसुओ में बही

रात आंसुओ में बही
तो सुबह बुरा मान गई
सुबह खामोस रही
तो दोपहर खफा हो गई
शाम को सोचा था
मना लेंगे अपने प्यार से उसे
पर अपनी तो शाम
भी किस्सों में उसके
यूँ उलझी की सारी शाम गई

बुधवार, 9 मई 2012

चार पन्नो में पलट जाएगी ये जिन्दगी मेरी

चार पन्नो में पलट जाएगी ये जिन्दगी मेरी
२ तेरे प्यार के और २ मेरी बर्बादी के है
मैंने तो बहुत संभाल के लिखी थी
प्यार की ये कहानी अपनी
पर तेरा इरादा कुछ और निकला

मेरे किस्सों में तेरा किस्सा जब भी आता है

मेरे किस्सों में तेरा किस्सा जब भी आता है
इस शख्स का चेहरा यूँही खिल जाता है
तू ज़माने भर से छुपा ले
ये हकीकत मेरी
पर तेरे साथ जुड़कर
हाँ मेरा नाम तो हो जाता है