हुई जो रात तो मुझको याद
तुम आ गई
छिड़ी जो कोई बात तो मुझको
याद तुम आ गई
बात बे बात, जाने क्या बात
आज फिर से याद मुझको
तुम आ गई..
यूँ तो मैंने वादा किया था तुझसे
और तुने मुझसे ..
फिर कभी ना याद
एक-दुसरे को करने का
पर आज तोडके हर वादा अपना
और भुला के हर बात
मुझको याद तुम आ गई
हुई जो रात तो मुझको याद
तुम आ गई
ये माना की आज हम-तुम साथ नहीं है
मगर हम जेहन में तो है एक-दुसरे के
जो अगर झूठा हूँ मैं और ये भ्रम है मेरा
फिर क्यूँ आज सालो के बाद
फिर से मुझको याद तुम आ गई
हुई जो रात तो मुझको याद
तुम आ गई ..
जयदेव जोनवाल एक उभरते हुए युवा कवि हैं, जिनकी रचनाओं में उसी ताजगी का आभास होता है जो वास्तव में एक युवा कवि की रचनाओं में होना चाहिए। मेरी उन्हें ढेरों शुभकामनायें। जयदेव अच्छी रचनाओं का निर्माण करें और हिन्दी की निरंतर सेवा करते रहें। जय हिंद! जय हिन्दी! सुमित प्रताप सिंह (दिल्ली गान के रचयिता) हास्य कवि जयदेव जोनवाल सम्पर्क सूत्र -: 09250683519,8826725292
शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011
बुधवार, 28 दिसंबर 2011
आती है उसकी याद ...
आती है उसकी याद जब भी लेता हूँ, साँस
खोलता हूँ किताब आती है, उसकी याद
जब कभी रहूँ दोस्तों में, मैं फिर भी लगे अकेलापन
आती है उसकी याद, जब भी लेता हूँ साँस
भीड़ में रहकर भी न जाने क्यूँ तन्हा सा लगे
अपनों में होकर भी मुझको बेगाना सा लगे
है अजीब सी कशमश इस जिन्दगी और मेरे बीच में
जो करू खुद से बात तो आती है उसकी याद
जब भी लेता हूँ सांस..
वो समंदर है गहरा
और मैं हूँ उस समंदर का किनारा
वो जब भी मिले मुझसे
तो मैं छू लू ये जहा सारा
जो गर हम हो जुदा मिलकर फिर से
तो ये रोता है किनारा
आती है उसकी याद जब भी महसूस करता हूँ
उसका एहसास .....
आती है उसकी याद जब भी लेता हूँ, साँस ...
खोलता हूँ किताब आती है, उसकी याद
जब कभी रहूँ दोस्तों में, मैं फिर भी लगे अकेलापन
आती है उसकी याद, जब भी लेता हूँ साँस
भीड़ में रहकर भी न जाने क्यूँ तन्हा सा लगे
अपनों में होकर भी मुझको बेगाना सा लगे
है अजीब सी कशमश इस जिन्दगी और मेरे बीच में
जो करू खुद से बात तो आती है उसकी याद
जब भी लेता हूँ सांस..
वो समंदर है गहरा
और मैं हूँ उस समंदर का किनारा
वो जब भी मिले मुझसे
तो मैं छू लू ये जहा सारा
जो गर हम हो जुदा मिलकर फिर से
तो ये रोता है किनारा
आती है उसकी याद जब भी महसूस करता हूँ
उसका एहसास .....
आती है उसकी याद जब भी लेता हूँ, साँस ...
बुधवार, 21 दिसंबर 2011
अजीब सी हलचल दिल में है आजकल
अजीब सी हलचल दिल में है आजकल
ऐसा लगता है की जैसे कुछ चल रहा है अन्दर
आजकल बिना किसी बात के..
कभी मैं बहुत खुश तो कभी उदास हो जाता हूँ
पता नहीं है क्यूँ मेरे साथ..
ऐसा हो रहा है आजकल
अजीब सी हलचल दिल में है आजकल
कुछ लोग कहते है की ये प्यार है
कुछ कहे ये दीवानगी है मेरी
मैं पागल हो गया हूँ.
अगर ये सच है.......
तो क्यूँ मैं जिन्दा हूँ आजतक
अजीब सी हलचल है दिल में आजकल
कहने को तो ये सारी दुनिया है "जय" अपनी
और तू हिस्सा है इसका
मगर फिर भी क्यूँ तू...
जुदा है सा है , इनसे आजतक
अजीब सी हलचल दिल में है आजकल
यूँ तो सब है मेरे
और मैं हूँ सबका
मगर फिर क्यूँ तू उस एक शख्स पर
ही ठहरा हुआ है आजतक
अजीब सी हलचल दिल में है आजकल
ये माना की आज जिन्दगी
कल जैसी ना रही .
मगर जो कुछ भी बदला ..
उसे क्यूँ तू "जय " एतमाद ना कर पाया आजतक
अजीब सी हलचल दिल में है आजकल
ऐसा लगता है की जैसे कुछ चल रहा है अन्दर
आजकल बिना किसी बात के..
कभी मैं बहुत खुश तो कभी उदास हो जाता हूँ
पता नहीं है क्यूँ मेरे साथ..
ऐसा हो रहा है आजकल
अजीब सी हलचल दिल में है आजकल
कुछ लोग कहते है की ये प्यार है
कुछ कहे ये दीवानगी है मेरी
मैं पागल हो गया हूँ.
अगर ये सच है.......
तो क्यूँ मैं जिन्दा हूँ आजतक
अजीब सी हलचल है दिल में आजकल
कहने को तो ये सारी दुनिया है "जय" अपनी
और तू हिस्सा है इसका
मगर फिर भी क्यूँ तू...
जुदा है सा है , इनसे आजतक
अजीब सी हलचल दिल में है आजकल
यूँ तो सब है मेरे
और मैं हूँ सबका
मगर फिर क्यूँ तू उस एक शख्स पर
ही ठहरा हुआ है आजतक
अजीब सी हलचल दिल में है आजकल
ये माना की आज जिन्दगी
कल जैसी ना रही .
मगर जो कुछ भी बदला ..
उसे क्यूँ तू "जय " एतमाद ना कर पाया आजतक
अजीब सी हलचल दिल में है आजकल
मंगलवार, 20 दिसंबर 2011
रात कुछ अजीब थी ..
रात कुछ अजीब थी
वो कुछ करीब थी
थी कुछ अजीब सी सरगोशी हवाओ में
मेरे रूबरू था सारा जहा ..
जो वो इस कदर मुझको जेह-नसीब थी
था कहा फिर डर मुझे इस ज़माने का
जो साथ थी वो मेरे ..
वो जो मुझ में शरीक थी ..
मगर जब नींद खुली
तो फुटा ये मुकद्दर मेरा
वो महबूबा नहीं ....
मेरे महबूब की फटी तस्वीर थी
रात कुछ अजीब थी ...
वो कुछ करीब थी
थी कुछ अजीब सी सरगोशी हवाओ में
मेरे रूबरू था सारा जहा ..
जो वो इस कदर मुझको जेह-नसीब थी
था कहा फिर डर मुझे इस ज़माने का
जो साथ थी वो मेरे ..
वो जो मुझ में शरीक थी ..
मगर जब नींद खुली
तो फुटा ये मुकद्दर मेरा
वो महबूबा नहीं ....
मेरे महबूब की फटी तस्वीर थी
रात कुछ अजीब थी ...
सोमवार, 19 दिसंबर 2011
रात के अँधेरे से हमें डर लगता है.
रात के अँधेरे से हमें डर लगता है
सुबह की रौशनी से हमें डर लगता है..
ये दुनिया कुछ भी तो नहीं है..
मेरे लिए......................
मगर मुझे तेरी बदनामी से
डर लगता है .............
सुबह की रौशनी से हमें डर लगता है..
ये दुनिया कुछ भी तो नहीं है..
मेरे लिए......................
मगर मुझे तेरी बदनामी से
डर लगता है .............
तुझको चाहू तो खता क्या है......
तुझको चाहू तो खता क्या है.
है तू मोहब्बत मेरी तो बुरा क्या है.
लोग अक्सर बदल जाते है
एक वक़्त के बाद..
जो अगर मैं ना बदलू कभी तेरे लिए
इस दिल से .....
तो मेरी सजा क्या है?....
है तू मोहब्बत मेरी तो बुरा क्या है.
लोग अक्सर बदल जाते है
एक वक़्त के बाद..
जो अगर मैं ना बदलू कभी तेरे लिए
इस दिल से .....
तो मेरी सजा क्या है?....
गुरुवार, 15 दिसंबर 2011
रात के गहरे सन्नाटे से निकल कर.
रात के गहरे सन्नाटे से
निकल कर...
वो एक रोज़ आई थी
मुझसे मिलने को...
जहा का डर था उसके दिल में
की कही कोई उसे देख ना ले साथ मेरे
वो दबे पाँव मिलने उस रोज़ आई थी मुझको
थी खामोसी उस रात कुछ ऐसी
की बिन कहे उसके..
मैंने पढ़ ली थी आँखे उसकी..
जो वो ना कह पाई थी मुझको
मेरा प्यार, और उसकी चाहत
यूँ तो थी एक सी ...
मगर वो कहा समझ पाई थी मुझको ..
मैंने किया था वादा उससे..
ता-उम्र उसके साथ जीने और मरने का
और उस रात उसकी मोजुदगी..
ने यूँ ऐसा असर किया मुझ पर
फिर कहा उस रात के बाद..
मैं कभी फिर से से मिल पाया था उसको
निकल कर...
वो एक रोज़ आई थी
मुझसे मिलने को...
जहा का डर था उसके दिल में
की कही कोई उसे देख ना ले साथ मेरे
वो दबे पाँव मिलने उस रोज़ आई थी मुझको
थी खामोसी उस रात कुछ ऐसी
की बिन कहे उसके..
मैंने पढ़ ली थी आँखे उसकी..
जो वो ना कह पाई थी मुझको
मेरा प्यार, और उसकी चाहत
यूँ तो थी एक सी ...
मगर वो कहा समझ पाई थी मुझको ..
मैंने किया था वादा उससे..
ता-उम्र उसके साथ जीने और मरने का
और उस रात उसकी मोजुदगी..
ने यूँ ऐसा असर किया मुझ पर
फिर कहा उस रात के बाद..
मैं कभी फिर से से मिल पाया था उसको
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