बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

मेरे घर का सामान सब बिखरा पड़ा है

मेरे घर का सामान सब बिखरा पड़ा है
तेरे जाने के बाद मेरा घर सुना बड़ा है
तुम जो आ जाओ तो रोनक हो मेरे घर में
वरना तेरे बिन ये जय - तन्हा बड़ा है 

इन लकीरों में तेरा साथ नहीं है

इन लकीरों में तेरा साथ नहीं है
शायद अब तुझको मुझसे प्यार नहीं है
मैं खुदा से और अपनों से लड़कर
तुझे अपना बना भी लेता
मगर तूने ही कहा ..
अब तुझको मुझपर एतबार नहीं है 

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

प्यार अपना दिखाना नहीं आता

प्यार अपना दिखाना नहीं आता
मुझे खुद को जताना नहीं आता
लोग अच्छे है सभी बस नज़रिये भर का फर्क है
एक मुझे ही बस उनको आइना दिखाना नहीं आता 

इन दीवारों से बहार अब उनकी आवाज़ नहीं जाती

इन दीवारों से बहार अब उनकी आवाज़ नहीं जाती
शायद कोई तो वजह है
जो अब वो कोयल की तरहा
पहले जैसी अब नहीं चह -चहiती

इन दीवारों से बहार अब उनकी आवाज़ नहीं जाती

इन दीवारों से बहार अब उनकी आवाज़ नहीं जाती
शायद कोई तो वजह है
जो अब वो कोयल की तरहा
पहले जैसी अब नहीं चह -चहiती 

अश्क आँखों से बहे और समंदर बन गए

अश्क आँखों से बहे और समंदर बन गए
तैरने की आदत नहीं थी मुझे
मैं यूँ तेरे भरोसे पर था
आँख जब मेरी खुली तो
मेरे सारे सपने मेरे सामने बिखर कर रह गए 

शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

तुम यूँ मुझे प्यार से ना देखा करो

तुम यूँ मुझे प्यार से ना देखा करो
ये दिल पागल है
मचल ही जाता है
तुम तो चाँद हो अकेले भी रोशनी दोगी
और देख के तुमको ये मेरा सितारा डूब जाता है