मंगलवार, 12 जून 2012

दो लफ्ज़ प्यार के मैं बोलू तो कैसे

दो लफ्ज़ प्यार के मैं बोलू तो कैसे
तू है सामने मेरे
 मैं अब अपने लब खोलू तो कैसे
 यूँ तो हूँ मैं शायर
 और है शायरी काम मेरा
 पर तेरे सामने मैं कोई शायरी कहूँ तो कैसे

रविवार, 10 जून 2012

ऐसी सज़ा दो तुम मुझे

ऐसी सज़ा दो तुम मुझे
 ऐसे करो तुम भूला दो मुझे
 लकिन मैं कितना याद आऊंगा तुम्हें
 जाते-जाते बस इतना बता दो मुझे

माना की जिन्दगी में कोई काम नहीं आता

माना की जिन्दगी में कोई काम नहीं आता
 माना की परवाना शमा के काम नहीं आता
ऐ-बेवफा लड़की तुने ये कैसे सोच लिया की
 चोट खाया आशिक किसी के काम नहीं आता

मोहब्बत को जरुरत नहीं तरफदारो की

मोहब्बत को जरुरत नहीं तरफदारो की
 वक़्त हर किसी को मोहब्बत करना सिखा देता है
 जिन्दा रहते है लोग जुदा होकर भी
 वक़्त सबको जीना सिखा देता है

होठ से जाम ना झलके

होठ से जाम ना झलके तो मज़ा क्या है तू अगर नज़रो से ना पिलाये नो नशा क्या है मुझको तो चढ़ जायेगी एक ही घुट में तू अगर सारा महखाना लुटा दे तो क्या है

शुक्रवार, 1 जून 2012

आंसुओ से दरिया भर गया

आंसुओ से दरिया भर गया
तेरी याद में ये वक़्त ठहर गया
मैं कैसे करूँ...
अब किसी से प्यार -भरी बातें
ये शख्स तो कब का मर गया

मेरी सब बातों का जवाब तू है

मेरी सब बातों का जवाब तू है
मेरे इस दिल का करार तू है
मैं अब कैसे भूला दूँ तुझको
मेरी तो हर आदत में शुमार तू है