मैं कभी प्यार से तुमको
अपना कहूँ तो बुरा क्या है?
मैं कभी तुमको
गले से लगा लूँ गिला क्या है ?
हाँ तुमको पसंद नहीं है
ये मेरा दीवानापन
पर अगर मैं
तुम्हारे सामने बहक जाऊं
तो सजा क्या है?
जयदेव जोनवाल एक उभरते हुए युवा कवि हैं, जिनकी रचनाओं में उसी ताजगी का आभास होता है जो वास्तव में एक युवा कवि की रचनाओं में होना चाहिए। मेरी उन्हें ढेरों शुभकामनायें। जयदेव अच्छी रचनाओं का निर्माण करें और हिन्दी की निरंतर सेवा करते रहें। जय हिंद! जय हिन्दी! सुमित प्रताप सिंह (दिल्ली गान के रचयिता) हास्य कवि जयदेव जोनवाल सम्पर्क सूत्र -: 09250683519,8826725292
बुधवार, 23 मई 2012
मोल इन्सा का नहीं मोल तो जज्बातों का है
मोल इन्सा का नहीं
मोल तो जज्बातों का है
ना मैं बुरा हूँ
ना तू बुरा है
बस फ़र्क तो नज़रिये का है
कोई सपनो में जीया करता है
तो कोई हकीकत में मरा करता है
बस फ़र्क इस नीयत का है
मोल तो जज्बातों का है
ना मैं बुरा हूँ
ना तू बुरा है
बस फ़र्क तो नज़रिये का है
कोई सपनो में जीया करता है
तो कोई हकीकत में मरा करता है
बस फ़र्क इस नीयत का है
आँख से अश्क बहे तो महखाना भर जायेगा
आँख से अश्क बहे
तो महखाना भर जायेगा
पीने वालो को नशा होता है शराब से
और मेरा दिल
तो तेरे दर्द से भर जायेगा
नशा उतर जाता है
शराब का एक रोज़
पर मुझको होश कब आयेगा
तो महखाना भर जायेगा
पीने वालो को नशा होता है शराब से
और मेरा दिल
तो तेरे दर्द से भर जायेगा
नशा उतर जाता है
शराब का एक रोज़
पर मुझको होश कब आयेगा
सोमवार, 21 मई 2012
पास आने दो मुझे मुझे यूँ ना तुम ठुकराया करो
पास आने दो मुझे
मुझे यूँ ना तुम ठुकराया करो
मैं तुम्हारा हूँ
फिर मुझसे यूँ ना
एतराज़ तुम जताया करो
प्यार जो गर है मुझसे
तो मुझपे भरोसा भी करो
यूँ ना मेरी नियत पे
तुम शक जताया करो
मुझे यूँ ना तुम ठुकराया करो
मैं तुम्हारा हूँ
फिर मुझसे यूँ ना
एतराज़ तुम जताया करो
प्यार जो गर है मुझसे
तो मुझपे भरोसा भी करो
यूँ ना मेरी नियत पे
तुम शक जताया करो
तुम ना आते तो मेरा क्या होता
तुम ना आते तो मेरा क्या होता
बनके आवारा गलियों में भटक रहा होता
तेरे मिलने से बदल गये है
मेरी जिन्दगी के मायने सभी
वरना अबतलक मैं
दुनिया की भीड़ में
कब का खो गया होता
बनके आवारा गलियों में भटक रहा होता
तेरे मिलने से बदल गये है
मेरी जिन्दगी के मायने सभी
वरना अबतलक मैं
दुनिया की भीड़ में
कब का खो गया होता
जिन्दगी तेरे सिवा अच्छी तो नहीं
जिन्दगी तेरे सिवा अच्छी तो नहीं
जो तू नहीं तो कुछ भी तो नहीं
फ़र्क महसूस नहीं होता
अब मुझे गम और खुशी में
मैं जिन्दा हूँ तो सही
पर अब मुझमे जिन्दगी तो नहीं
जो तू नहीं तो कुछ भी तो नहीं
फ़र्क महसूस नहीं होता
अब मुझे गम और खुशी में
मैं जिन्दा हूँ तो सही
पर अब मुझमे जिन्दगी तो नहीं
शुक्रवार, 18 मई 2012
मैं कही भी रहूँ तू अक्सर मेरे साथ होती है
मैं कही भी रहूँ
तू अक्सर मेरे साथ होती है
मैं कही अगर ठहर जाऊ
तो बरसात होती है
मेरी -तेरी लड़ाई
यूँ तो रोज़ का किस्सा है
पर अगर तुझसे जुदा
हो जाऊ तो ये आँखे रोती है
तू अक्सर मेरे साथ होती है
मैं कही अगर ठहर जाऊ
तो बरसात होती है
मेरी -तेरी लड़ाई
यूँ तो रोज़ का किस्सा है
पर अगर तुझसे जुदा
हो जाऊ तो ये आँखे रोती है
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