कुछ इस कदर गुमनाम है वो शेहर
जिसमें तो बसर करता है
मैं ठुन्ठ्ता हूँ , तुझे शेहर भर में
और तू मेरे अन्दर कही बसा हुआ
मुझे मिलता है
ये शेहर यूँ तो कब्रिशतान है
उन लोगो का
जो जिन्दा होकर भी मुर्दों की तरह जीते है
और इन्ही मुर्दों में
हम कोई जिन्दगी
तलाश करते है
तू हकीकत होके भी गुमनाम है इस शेहर में
और हम ज़माने भर में
तेरी तारीफे बयान करते है
कुछ इस कदर गुमनाम है वो शेहर
जिसमें हम तेरे होने का वजूद
तलाश करते है ,,......
जयदेव जोनवाल एक उभरते हुए युवा कवि हैं, जिनकी रचनाओं में उसी ताजगी का आभास होता है जो वास्तव में एक युवा कवि की रचनाओं में होना चाहिए। मेरी उन्हें ढेरों शुभकामनायें। जयदेव अच्छी रचनाओं का निर्माण करें और हिन्दी की निरंतर सेवा करते रहें। जय हिंद! जय हिन्दी! सुमित प्रताप सिंह (दिल्ली गान के रचयिता) हास्य कवि जयदेव जोनवाल सम्पर्क सूत्र -: 09250683519,8826725292
शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011
मंगलवार, 6 दिसंबर 2011
पड़ोसन की झलक अच्छी लगती है .....
पड़ोसन की झलक अच्छी लगती है
मेट्रो में सटी हर लड़की अच्छी लगती है
यूँ तो फेर लेती है...
हर लड़की आँखे मुझसे
मगर मुझे उनकी हर अदा अच्छी लगती है
पड़ोसन की झलक अच्छी लगती है
कभी चोराहे पे, कभी गली, कभी पार्क और मंदिर में
उलझ जाना...... मुझे ......
उनके साथ हर घडी अच्छी लगती है
मेरे हर दिन और हर रात में शामिल है, वो
मुझे हर लड़की परी लगती है .
पड़ोसन की झलक अच्छी लगती है
किसी एक के साथ, मैं क्यूँ बिता दू
ये जिन्दगी अपनी ओ - जय
मुझे तो हर लड़की अपनी लगती है
मेरी मोहब्बत, मेरा प्यार
मेरी चाहत है इन सबके लिये
मुझे तो हर कोई फुलझड़ी लगती है
पड़ोसन की झलक अच्छी लगती है
मैं कुछ भी तो नहीं, क्या है ये हस्ती मेरी
मगर जब मैं, होता हूँ साथ इनके ,पास इनके
भले वो खुवाब ही सही
तब ये सारी दुनिया..
मुझे अपनी सी लगती है
मैं अधुरा हूँ , उनके बिना
और वो अधूरी है मेरे बिना
मैं उनकी, और वो मुझे मेरी खुसी लगती है
हर लड़की मुझे मेरी जिन्दगी सी लगती है
पड़ोसन की झलक अच्छी लगती है
मेट्रो में सटी हर लड़की अच्छी लगती है
यूँ तो फेर लेती है...
हर लड़की आँखे मुझसे
मगर मुझे उनकी हर अदा अच्छी लगती है
पड़ोसन की झलक अच्छी लगती है
कभी चोराहे पे, कभी गली, कभी पार्क और मंदिर में
उलझ जाना...... मुझे ......
उनके साथ हर घडी अच्छी लगती है
मेरे हर दिन और हर रात में शामिल है, वो
मुझे हर लड़की परी लगती है .
पड़ोसन की झलक अच्छी लगती है
किसी एक के साथ, मैं क्यूँ बिता दू
ये जिन्दगी अपनी ओ - जय
मुझे तो हर लड़की अपनी लगती है
मेरी मोहब्बत, मेरा प्यार
मेरी चाहत है इन सबके लिये
मुझे तो हर कोई फुलझड़ी लगती है
पड़ोसन की झलक अच्छी लगती है
मैं कुछ भी तो नहीं, क्या है ये हस्ती मेरी
मगर जब मैं, होता हूँ साथ इनके ,पास इनके
भले वो खुवाब ही सही
तब ये सारी दुनिया..
मुझे अपनी सी लगती है
मैं अधुरा हूँ , उनके बिना
और वो अधूरी है मेरे बिना
मैं उनकी, और वो मुझे मेरी खुसी लगती है
हर लड़की मुझे मेरी जिन्दगी सी लगती है
पड़ोसन की झलक अच्छी लगती है
सोमवार, 5 दिसंबर 2011
मेरी कब्र पे वो आये..
मेरी कब्र पे वो आये
तो मुझे सुकून मिला
वरना दुनिया ने
दफना दिया था
कब का मुझको
मरा समझकर..
जो तुम आये.
तो मैं हकीकत में मर सका..
तो मुझे सुकून मिला
वरना दुनिया ने
दफना दिया था
कब का मुझको
मरा समझकर..
जो तुम आये.
तो मैं हकीकत में मर सका..
रविवार, 4 दिसंबर 2011
जिन्दगी तेरे साथ बिताने की कसम खाई थी...
जिन्दगी तेरे साथ बिताने की कसम खाई थी
मैंने खुद ही अपनी दुनिया में आग लगाई थी
मेरे घरवालो ने, मेरे दोस्तों ने तो बहुत समझाया था मुझे
मगर मैंने खुद ही अपने खीसे में आग लगाई थी
लोग हँसते रहे मेरा तमाशा देखकर
मगर मैंने खुदी ही अपनी घिल्ली उड़ाई थी
४ दिन का साथ ना मिला हमको तेरी मोहब्बत में
और मेरी खुशियों से सरे बाज़ार,
इस दुनिया ने यूँ दुश्मनी निभाई थी
ये दुनिया ४ दिन का तमाशा है
ऐ - जय .................
, कोई हसता है
तो कोई अश्को में डूब जाता है
या खुदा ये ज़मी पे तुने कैसी
कैसी जन्नत बसाई थी
मैंने खुद ही अपनी दुनिया में आग लगाई थी
मेरे घरवालो ने, मेरे दोस्तों ने तो बहुत समझाया था मुझे
मगर मैंने खुद ही अपने खीसे में आग लगाई थी
लोग हँसते रहे मेरा तमाशा देखकर
मगर मैंने खुदी ही अपनी घिल्ली उड़ाई थी
४ दिन का साथ ना मिला हमको तेरी मोहब्बत में
और मेरी खुशियों से सरे बाज़ार,
इस दुनिया ने यूँ दुश्मनी निभाई थी
ये दुनिया ४ दिन का तमाशा है
ऐ - जय .................
, कोई हसता है
तो कोई अश्को में डूब जाता है
या खुदा ये ज़मी पे तुने कैसी
कैसी जन्नत बसाई थी
शनिवार, 3 दिसंबर 2011
जिन्दगी हर किसी का साथ नहीं देती ....
जिन्दगी हर किसी का साथ नहीं देती
हारकर जीत का एहसास नहीं देती
यूँ तो हर कोई चाहता है
अपने हिस्से की खुशिया
मगर किसी का होकर मिट जाना
ये बात, हर किसी में नहीं होती..
हारकर जीत का एहसास नहीं देती
यूँ तो हर कोई चाहता है
अपने हिस्से की खुशिया
मगर किसी का होकर मिट जाना
ये बात, हर किसी में नहीं होती..
शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011
यूँ तो बदलाव....
यूँ तो बदलाव.....
जिन्दगी में एक नया मोड़ लाता है
पर जो रखते हो अपने दिलो में मैल
और धोखा...
उनके लिए या-खुदा - तू ही बता
किस तरह अपने आपको बदला जाता है..
जिन्दगी में एक नया मोड़ लाता है
पर जो रखते हो अपने दिलो में मैल
और धोखा...
उनके लिए या-खुदा - तू ही बता
किस तरह अपने आपको बदला जाता है..
गुरुवार, 1 दिसंबर 2011
देखकर उसको....
देखकर उसको काश
ये दिल मेरा ना डोला होता
तो आज मैं ना गधा होता
उसकी हँसी को जो मैंने
ना अपने दिल से लगाया होता
तो आज बन्दा में भी काम का होता
इस दिल का धडकना
और उसका मुझको देख कर शर्मना
तीर जो उसका मुझ पर ना चला होता
तो आज मैं भी २ बच्चो का बाप होता
उसके इंतज़ार में और उसके भरोसे पे
काट दी मैंने अपनी ये उम्र सारी
और वो बन गयी और किसी की घरवाली
ख़ास मैं यूँ गधो का सरताज ना होता
देखकर उसको काश .
ये दिल मेरा ना डोला होता
तो आज मैं ना गधा होता
ये दिल मेरा ना डोला होता
तो आज मैं ना गधा होता
उसकी हँसी को जो मैंने
ना अपने दिल से लगाया होता
तो आज बन्दा में भी काम का होता
इस दिल का धडकना
और उसका मुझको देख कर शर्मना
तीर जो उसका मुझ पर ना चला होता
तो आज मैं भी २ बच्चो का बाप होता
उसके इंतज़ार में और उसके भरोसे पे
काट दी मैंने अपनी ये उम्र सारी
और वो बन गयी और किसी की घरवाली
ख़ास मैं यूँ गधो का सरताज ना होता
देखकर उसको काश .
ये दिल मेरा ना डोला होता
तो आज मैं ना गधा होता
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