रविवार, 30 दिसंबर 2012

रात ढलने से डर लगता है


रात ढलने से डर लगता है
मुझको तेरी यादों से डर लगता है
दिन के उजाले में
मैं जिंदगी को जी लेता हूँ
मगर रात की तन्हाई में
मुझे तेरी मोजुदगी से डर लगता है


हास्य कवि / शायर .....


(जयदेव जोनवाल )

कत्ल अपनों का नहीं करते


कत्ल अपनों का नहीं करते
वो दुनिया को लुट लेते है
वो बड़े शातिर है
महफूज़ रखते है
खुद के घर की अस्मत
और औरो के घर की इज्जत
को पैरो तले रोंद देते है


हास्य कवि / शायर .....


(जयदेव जोनवाल )

वक़्त और हालात पे मैं अब बात क्या करूँ


वक़्त और हालात पे
मैं अब बात क्या करूँ
मैं कहूँ किसे सही और किसे गलत
मैं अब लोगो की नियत का हिसाब क्या करूँ
लोग सच्चे है सभी
अब मैं उन्हें और बेनकाब क्या करूँ

हास्य कवि / शायर .....


(जयदेव जोनवाल )

घर एक ना बना मुझसे


घर एक ना बना मुझसे
और हज़ार घर टूट गये
जो की मैंने सच की तकरीर
कभी तो मुझसे मेरे अपने छुट गये


हास्य कवि / शायर .....


(जयदेव जोनवाल )

ये मोहब्बत के पल गुज़र जायेंगे

ये मोहब्बत के पल गुज़र जायेंगे
कल तुम और मैं फ़ना हो जायेंगे
वक़्त जितना भी है प्यार में जी लो
कल कहाँ ये पल लौटकर फिर आयेंगे


हास्य कवि / शायर .....


(जयदेव जोनवाल )

आखिरकार रेप -पीड़िता की
कानून तौर पर मौत की


पुष्टि कर दी गई
सवाल फिर सवाल रह गये

हिन्दुस्तान .......................?????


हास्य कवि / शायर .........

( जयदेव जोनवाल )


मंगलवार, 25 दिसंबर 2012

शहर बदल गया


शहर बदल गया
लोग बदल गए
जो वो कल निकली थी
घर से बन - सवरकर
तो लोगो के तेवर बदल गए
वो मासूम थी जिंदगी जीना चाहती थी
आज उसकी जिंदगी के मायने बदल गए


हास्य कवि / शायर ......

( जयदेव जोनवाल )