शनिवार, 12 जनवरी 2013

जिस्म मिट्टी है



जिस्म मिट्टी है
और मिट्टी ही बन जायेगा
दिल ये सच्चा है
मरके भी तुझको चाहेगा
मैं भुला दूँ  तुझको कैसे
ये तू ही बता
मेरे होठो पे मरके भी
तेरा ही नाम आयेगा

हास्य कवि / शायर ......

(  जयदेव  जोनवाल )

साथ छुटेगा तो छुट ही जायेगा



साथ छुटेगा तो छुट ही जायेगा
हम बिछड़े तो बिछड़ ही जायेंगे
अब मैं कैसे करू , कैद इस वक़्त को
अपनी मुट्ठी में
तू जो छुटा तो मेरे हाथो से फिसल जायेगा


हास्य कवि / शायर ......

(  जयदेव  जोनवाल )

लोगो के मुह से निवाला छीन लेते है 
ये सियासी लोग है, कफ़न बेच देते है 
बेच देते है ये सबकुछ , चन्द टुकडो के लिए 
ये इंसानियत बेच देते है 



हास्य कवि / शायर ...

( जयदेव जोनवाल )

रविवार, 6 जनवरी 2013

आप होतो हम है



आप होतो हम है
वरना कहाँ हम है
है आपसे ही ये दुनिया हमारी
जो आप नहीं तो फिर कहाँ हम है


कवि / शायर ..

( जयदेव जोनवाल)

साथ फेरो में नहीं प्यार तो इस दिल में है



साथ फेरो में नहीं 
प्यार तो इस दिल में है 
कसमो- वादों में नहीं 
चाहत तो मोहब्बत में है 
हम है तबतक किसी के 
जबतक हम चाहे 
वरना इन दलीलों में रखा क्या है 


कवि / शायर ..

( जयदेव जोनवाल)

रात का अन्धेरा अब कहाँ मिटेगा



रात का अन्धेरा अब कहाँ मिटेगा
तुझे खो कर कहा
अब मेरी जिंदगी में उजाला होगा
मेरा जो भी था
वो मैंने खो दिया
अब मुझे तुझसे बेहतर
क्या और कोई मिलेगा


कवि / शायर ..

( जयदेव जोनवाल)

आईना तोड के आ जाओ


आईना तोड के आ जाओ
तुम ये शहर छोड़ के आ जाओ
दुरिया जितनी भी है
वो अब तो कम हो
तुम अब सब पिंजरे तोड़कर आ जाओ

कवि / शायर ..

( जयदेव जोनवाल)