बुधवार, 9 मई 2012

बहुत चाहा है मैंने तुझको

बहुत चाहा है मैंने तुझको
मैं अब अपनी चाहत का क्या हिसाब करू
अगर समझना होता
तो तू समझ जाती अबतलक मुझको
अब भला मैं कबतलक
यूँ खुद की नुमाइश करू

सोमवार, 7 मई 2012

आज जो आये होतो लौट के फिर ना जाओ

आज जो आये होतो
लौट के फिर ना जाओ
इतनी जल्दी भी है क्या
दो घडी तो ठहर जाओ
वक़्त का क्या भरोसा
है आज हम और कल नहीं
ऐ-सनम कम से कम
आज के लिए तो मेरे हो जाओ

तुम कभी प्यार से मुझे देखा भी करो

तुम कभी प्यार से मुझे देखा भी करो
हाँ थोडा अजीब सा हूँ मैं
पर कभी जूठे ही सही
मेरी तारीफ तो किया करो
अल्फाज़ दो ही बहुत है मेरे लिए
पर कभी तो तुम
मेरे लिए कुछ कहा करो

पलके मुंधू तो तेरा चेहरा दिखाई दे

पलके मुंधू तो तेरा चेहरा दिखाई दे
दिल ये टटोलू तो तेरी धड़कन सुनाई दे
हूँ मैं अजीब सी हालत में आजकल
मैं जहाँ भी देखूं
तो बस मुझे तू ही दिखाई दे

गुरुवार, 3 मई 2012

मेरे जिन्दा होने की वजह तू है

मेरे जिन्दा होने की वजह तू है
मैं हूँ इस दुनिया में इसका सिला तू है
मुझे समझने के लिये
यूँ तो है ये सारी दुनिया
मगर मेरी फितरत को समझता तू है

तेरे जाने की कोई तो वजह होगी?

तेरे जाने की कोई तो वजह होगी?
हाँ कसूर मेरा ही था
जो मैं ना तुझे रोक सका
मेरी सफाई में कोई तो कमी होगी?

बिन कहे दिल की कोई बात करू तो कैसे ?

बिन कहे दिल की कोई बात
करू तो कैसे ?
मैं चुप रहूँ
तो अपने जज्बात कहूँ कैसे?
मुझको नहीं आता इजहार-ऐ- मोहब्बत करना
अब मैं तुझसे अपने हालत कहूँ तो कैसे?